राजधानी की मेट्रो को पड़ोसी जिलों तक ले जाने की कवायद तेज, बाराबंकी समेत कई इलाकों में जमीन की तलाश शुरू।
उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ मेट्रो को शहर की सीमा से बाहर निकालने की तैयारी शुरू कर दी है। पहले चरण में पड़ोसी जिला बाराबंकी को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है।
एक ओर एनसीआर की तर्ज पर राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) बनाने की तैयारी चल रही है, तो दूसरी ओर मेट्रो के विस्तार के लिए जमीन चिन्हित करने का काम भी शुरू हो गया है।
क्या हुआ
सर्वे टीमों ने दस नए कॉरिडोर के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है। इस कवायद में लखनऊ को आसपास के उपनगरों और जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाले रूट शामिल हैं।
लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर पूर्व में स्थित बाराबंकी उन इलाकों में है, जहां जमीन चिन्हित करने का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। यह कदम राज्य स्तर पर शहरी परिवहन कनेक्टिविटी बढ़ाने के हालिया निर्देशों के बाद उठाया गया है।
क्यों जरूरी है
बाराबंकी के मेट्रो नेटवर्क से जुड़ने पर रोजाना लखनऊ आने-जाने वाले हजारों लोगों का सफर छोटा और आसान हो जाएगा। कॉरिडोर के आसपास के इलाकों में रिहायशी और व्यावसायिक निवेश के नए मौके भी खुल सकते हैं, खासकर उन जगहों पर जहां अभी जमीन की कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं।
लखनऊ की मुख्य मेट्रो प्रणाली के लिए बाहरी विस्तार यात्री संख्या बढ़ाने और संचालन राजस्व को बेहतर करने में मददगार साबित होता है।
विशेषज्ञ की राय
लाइव हिंदुस्तान लखनऊ से बातचीत में शहरी नियोजन अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जमीन चिन्हिकरण किसी भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट से पहले का अहम कदम है। जमीन की उपलब्धता साफ न होने पर कॉरिडोर का संरेखण सालों लटका रहता है।
अगर एससीआर का प्रस्ताव औपचारिक रूप लेता है, तो मेट्रो विस्तार परियोजनाओं को प्रशासनिक और वित्तीय सहयोग का एक मजबूत ढांचा मिल सकता है।
खरीदार क्या ध्यान रखें
प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के आसपास संपत्ति खरीदने की सोच रहे लोग यह जरूर समझ लें कि जमीन चिन्हित होने भर से अंतिम रूट तय नहीं होता। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, पर्यावरणीय मंजूरी और राज्य मंत्रिमंडल की मुहर बाकी है। आधिकारिक संरेखण जारी होने के बाद ही खरीदारी का फैसला करना सुरक्षित रहेगा।
