पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर से कंकरखेड़ा, जागृति विहार, मंगल पांडे नगर जैसे इलाकों को सीधा मेट्रो कनेक्शन मिलेगा।
मेरठ का मेट्रो नेटवर्क अब तक के सबसे बड़े विस्तार की तैयारी में है। दो प्रस्तावित चरणों में कुल 19 नए स्टेशन बनाए जाएंगे, जो शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों तक रैपिड ट्रांज़िट पहुंचाएंगे। इस योजना से बसे हुए आवासीय इलाकों, व्यस्त बाज़ारों, शिक्षा केंद्रों और मेडिकल ज़ोन को मास कनेक्टिविटी मिलेगी।
क्या हुआ
अधिकारियों ने दो चरणों वाला प्रस्ताव रखा है जिसमें मेरठ मेट्रो में 19 नए स्टेशन जोड़े जाएंगे। पहला कॉरिडोर शहर के पूर्वी भाग को कवर करेगा, जबकि दूसरा पश्चिम की ओर विस्तार करेगा। दोनों मार्ग मिलकर उन मोहल्लों को जोड़ेंगे जो अब तक मेट्रो ग्रिड से बाहर थे।
विस्तार में कंकरखेड़ा, जागृति विहार और मंगल पांडे नगर का नाम शामिल है। ये इलाके बाज़ारों, कॉलेजों और अस्पतालों के बीच स्थित हैं, जहां पैदल यात्रियों की संख्या अधिक रहती है और स्टेशन की सुविधा सीधा लाभ देगी।
क्यों अहम है
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए मेट्रो स्टेशन का जुड़ना इलाके की मांग बदल देता है। जिन मोहल्लों को स्टेशन मिलता है, वहां परिवारों, छात्रों और मेडिकल स्टाफ़ की दिलचस्पी बढ़ती है क्योंकि आवागमन का समय निश्चित हो जाता है। कंकरखेड़ा, जागृति विहार और मंगल पांडे नगर पहले से जाने-माने रिहायशी इलाके हैं; मेट्रो एक्सेस इनके किराये और रीसेल प्रोफ़ाइल को मध्यम अवधि में ऊपर ले जा सकता है।
शहर के स्तर पर देखें तो पूर्वी और पश्चिमी विस्तार मेरठ के सार्वजनिक परिवहन मानचित्र की एक बड़ी कमी पूरी करता है। खरीदार बाहरी इलाकों में निवेश से अक्सर इसलिए हिचकते हैं क्योंकि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी नहीं होती। यह योजना सीधे उसी कमी को दूर करती है।
एक्सपर्ट व्यू
जब किसी ट्रांज़िट प्रोजेक्ट में किसी मोहल्ले को पक्के स्टेशन की जगह घोषित किया जाता है, तो उस क्षेत्र की ज़मीन और फ़्लैट की कीमतें आमतौर पर निर्माण पूरा होने से पहले ही प्रतिक्रिया देने लगती हैं। मौजूदा प्रस्ताव के आधार पर, कंकरखेड़ा, जागृति विहार और मंगल पांडे नगर में प्रॉपर्टी तलाशने वाले खरीदारों को ज़ोनिंग अपडेट और स्टेशन साइट प्लान पर नज़र रखनी चाहिए। टेंडर जारी होने और ज़मीनी काम शुरू होने के बाद इन जगहों पर भाव तेज़ी पकड़ सकते हैं।
खरीदार क्या जांचें
घर खरीदने वालों को पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर के आधिकारिक अलाइनमेंट मैप पर नज़र रखनी चाहिए। स्टेशन के प्रवेश द्वार की सटीक स्थिति मायने रखती है—800 मीटर की पैदल दूरी के भीतर की प्रॉपर्टी आमतौर पर कनेक्टिविटी का सबसे अधिक प्रीमियम हासिल करती है। पहले और दूसरे चरण के निर्माण की समय-सीमा की पुष्टि करना भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि जो चरण पहले बनेगा उसके इलाकों को मेट्रो सेवा सबसे पहले मिलेगी।
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