विकसित प्लॉट चुनने वाले किसानों को अब पहले से कहीं अधिक मुआवजा मिलेगा, जिससे स्मार्ट सिटी के लिए जमीन जुटाने की रफ्तार बढ़ेगी।
उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी नियोजित शहरी विस्तार परियोजनाओं में से एक को तेज़ करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने न्यू नोएडा के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में भारी वृद्धि कर दी है। उन किसानों के लिए मुआवजे की दरें 53% तक बढ़ाई गई हैं जो एकमुश्त नकद राशि के बदले विकसित प्लॉट लेना पसंद करते हैं। इस कदम का सीधा उद्देश्य ज़मीन जुटाने की प्रक्रिया में तेज़ी लाना और किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
क्या हुआ
7 सितंबर 2026 को नोएडा प्राधिकरण ने न्यू नोएडा की मास्टर प्लानिंग से जुड़ी मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव किया। जो किसान सिर्फ नकद राशि लेने की जगह विकसित आवासीय या व्यावसायिक प्लॉट स्वीकार करेंगे, उनके भूमि पार्सल का मूल्यांकन अब 53% अधिक दर पर किया जाएगा। इस रणनीति का मकसद किसानों को ज़मीन के बदले ऐसी संपत्ति देना है जिसकी कीमत भविष्य में और बढ़ेगी, साथ ही प्राधिकरण को तत्काल बड़े नकद भुगतान से भी राहत मिलेगी।
न्यू नोएडा परियोजना को वर्ष 2041 तक चार चरणों में विकसित करने की योजना है। इसके तहत हजारों एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण आधुनिक आवास, लॉजिस्टिक पार्क और औद्योगिक केंद्रों के लिए किया जाना है।
क्यों है यह अहम
न्यू नोएडा जैसी विशाल परियोजना में सबसे बड़ी बाधा समय पर ज़मीन का इकट्ठा होना है। चार चरणों में होने वाले इस अधिग्रहण में अगर अभी से रुकावट आई तो सड़क नेटवर्क, औद्योगिक अलॉटमेंट और बुनियादी ढांचे की समयसीमा पूरी तरह प्रभावित होगी। विकसित प्लॉटों पर 53% अधिक मुआवजा देकर प्राधिकरण ने किसानों की उस आशंका को दूर करने की कोशिश की है जिसमें उन्हें लगता है कि ज़मीन जाने के बाद उनकी आजीविका खत्म हो जाएगी। अब किसान उसी शहर में निर्मित संपत्ति के मालिक बनेंगे, जिससे स्थानीय समुदाय भी इस विकास में सीधा भागीदार बनेगा और कानूनी अड़चनों की संभावना कम होगी।
रियल एस्टेट बाज़ार के लिए इसका मतलब सप्लाई की निश्चितता है। नियोजित टाउनशिप और औद्योगिक क्षेत्र तभी शुरू हो सकते हैं जब ज़मीन के एकसार बड़े टुकड़े बिना किसी विवाद के सरकार के पास हों।
विशेषज्ञों की राय
रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सरकारी अधिग्रहण में कच्ची ज़मीन की जगह विकसित प्लॉट को मुआवजे का आधार बनाना एक व्यावहारिक कदम है। जब किसान विकसित प्लॉट लेते हैं, तो वे उसी स्मार्ट सिटी ग्रिड में भविष्य की संपत्ति के मालिक बन जाते हैं, जिससे उनका हित सीधे परियोजना की सफलता से जुड़ जाता है। इससे अधिग्रहण की प्रक्रिया में लगने वाला 5 से 7 साल का सामान्य समय घट सकता है। 53% की वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्राधिकरण के लिए परियोजना की गति, छोटी-मोटी नकद बचत से कहीं अधिक मायने रखती है।
खरीदारों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
न्यू नोएडा में निवेश की योजना बनाने वाले घर खरीदारों और औद्योगिक निवेशकों को पहले चरण के भूमि अधिग्रहण की गति पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। हालांकि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को तैयार करने में मददगार होगा, लेकिन पहले चरण के विकसित सेक्टरों का वास्तविक कब्ज़ा इस बात पर निर्भर करेगा कि प्राधिकरण लगातार ज़मीन के बड़े हिस्से कितनी तेज़ी से जुटा पाता है। निवेशकों को आने वाली स्कीमों पर भी ध्यान देना होगा, जहां इन अधिग्रहीत ज़मीनों को आवासीय और व्यावसायिक अलॉटमेंट में बदला जाएगा, क्योंकि अंतिम सर्कल रेट और बुनियादी ढांचा विकास शुल्क ही प्रवेश की वास्तविक कीमत तय करेंगे।